Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.208.27: मित्र और सम्बन्धी अपने समृद्ध बन्धुओं के साथ भी प्रसन्न नहीं रहते। अपने को विद्वान् समझने वाले मूर्ख लोग भी अपने गुरुओं की निन्दा करते हैं। 27॥ | mahabharat अध्याय 3.208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समृद्धैश्च न नन्दन्ति बान्धवा बान्धवैरपि।
गुरूंश्चैव विनिन्दन्ति मूढा: पण्डितमानिन:॥ २७॥
अनुवाद
मित्र और सम्बन्धी अपने समृद्ध बन्धुओं के साथ भी प्रसन्न नहीं रहते। अपने को विद्वान् समझने वाले मूर्ख लोग भी अपने गुरुओं की निन्दा करते हैं। 27॥
Friends and relatives are not happy even with their prosperous relatives. Foolish people who consider themselves scholars also criticize their teachers. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥