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mahabharat 3.208.25: हे ब्रह्म! जो पुरुष श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुए हैं, श्रेष्ठ गुणों से युक्त हैं और श्रेष्ठ माने जाते हैं, वे भी भयंकर कर्म करके लज्जित होते हैं॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.208.25 
आलक्ष्याश्चैव पुरुषा: कुले जाता महागुणा:।
महाघोराणि कर्माणि कृत्वा लज्जन्ति वै द्विज॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्म! जो पुरुष श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुए हैं, श्रेष्ठ गुणों से युक्त हैं और श्रेष्ठ माने जाते हैं, वे भी भयंकर कर्म करके लज्जित होते हैं॥25॥
 
Brahman! Even men who are born in noble families, have the highest virtues and are considered the best, feel ashamed by committing terrible deeds. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)