Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.208.24: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! तपस्वी लोग अहिंसा धर्म का पालन करने के लिए तत्पर रहते हैं, परन्तु वे भी हिंसा ही करते हैं (अर्थात् उनसे भी हिंसा होती है)। निश्चय ही सावधानीपूर्वक प्रयत्न करने से हिंसा की मात्रा को बहुत हद तक कम किया जा सकता है॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 3.208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहिंसायां तु निरता यतयो द्विजसत्तम।
कुर्वन्त्येव हि हिंसां ते यत्नादल्पतरा भवेत्॥ २४॥
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! तपस्वी लोग अहिंसा धर्म का पालन करने के लिए तत्पर रहते हैं, परन्तु वे भी हिंसा ही करते हैं (अर्थात् उनसे भी हिंसा होती है)। निश्चय ही सावधानीपूर्वक प्रयत्न करने से हिंसा की मात्रा को बहुत हद तक कम किया जा सकता है॥ 24॥
‘O best of the Brahmins! The ascetics are ready to follow the religion of non-violence, but they too end up committing violence (i.e. violence is committed by them too). Certainly, by making efforts with care, the amount of violence can be reduced to a great extent.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥