vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन
»
श्लोक 20
श्लोक
3.208.20
चङ्क्रम्यमाणा जीवांश्च धरणीसंश्रितान् बहून्।
पद्भॺां घ्नन्ति नरा विप्र तत्र किं प्रतिभाति ते॥ २०॥
अनुवाद
चलते समय मनुष्य अनजाने में ही अपने पैरों से पृथ्वी पर रहने वाले बहुत से प्राणियों को मार डालते हैं। हे ब्रह्मन्! तुम उनके विषय में क्या सोचते हो?॥ 20॥
‘While walking, human beings (inadvertently) kill many living creatures on earth with their feet. O Brahman! What do you think about them?॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×