Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.208.19: हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! प्रायः जीव दूसरे जीवों से जीवन प्राप्त करते हैं और जीव स्वयं एक-दूसरे को अपना आहार बनाते हैं। इनके विषय में आप क्या सोचते हैं?॥19॥ | mahabharat अध्याय 3.208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! प्रायः जीव दूसरे जीवों से जीवन प्राप्त करते हैं और जीव स्वयं एक-दूसरे को अपना आहार बनाते हैं। इनके विषय में आप क्या सोचते हैं?॥19॥
‘O great Brahmin! Often living beings derive life from other living beings and living beings themselves make each other their food. What do you think about them?॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥