Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.208.18: यह सारा जगत् प्राणियों से व्याप्त है, जो दूसरे प्राणियों पर आश्रित रहते हैं। मछलियाँ तो दूसरी मछलियों को भी खा जाती हैं। तुम उनके विषय में क्या सोचते हो?॥18॥ | mahabharat अध्याय 3.208: धर्मव्याधद्वारा हिंसा और अहिंसाका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह सारा जगत् प्राणियों से व्याप्त है, जो दूसरे प्राणियों पर आश्रित रहते हैं। मछलियाँ तो दूसरी मछलियों को भी खा जाती हैं। तुम उनके विषय में क्या सोचते हो?॥18॥
‘The whole world is permeated by living beings who live on other living beings. Fishes even consume other fishes. What do you think about them?॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥