Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.97-99h: द्विजश्रेष्ठ! जो धर्मात्मा पुरुष सदा शिष्टाचार का पालन करते हैं और ज्ञानरूपी सिंहासन पर बैठकर नाना प्रकार के लोगों के आचरण का निरीक्षण करते हैं तथा उत्तम-अत्यंत पुण्य-पाप कर्मों का पुनरावलोकन करते हैं, वे महान भय से मुक्त हो जाते हैं। 97-98 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्विजश्रेष्ठ! जो धर्मात्मा पुरुष सदा शिष्टाचार का पालन करते हैं और ज्ञानरूपी सिंहासन पर बैठकर नाना प्रकार के लोगों के आचरण का निरीक्षण करते हैं तथा उत्तम-अत्यंत पुण्य-पाप कर्मों का पुनरावलोकन करते हैं, वे महान भय से मुक्त हो जाते हैं। 97-98 1/2॥
Dwijshreshtha! Those pious men who always follow etiquettes and, seated on the throne of wisdom, observe the behavior of various people and review the most virtuous and sinful deeds, they become free from great fear. 97-98 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥