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mahabharat 3.207.93-94h: सज्जन पुरुष केवल तीन बातें बताते हैं - किसी के साथ विश्वासघात न करना, दान देना और सदैव सत्य बोलना। यह सज्जन पुरुषों का सर्वोत्तम व्रत है।   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 93-94h
 
 
श्लोक  3.207.93-94h 
त्रीण्येव तु पदान्याहु: सतां व्रतमनुत्तमम्॥ ९३॥
न चैव द्रुह्येद् दद्याच्च सत्यं चैव सदा वदेत्।
 
 
अनुवाद
सज्जन पुरुष केवल तीन बातें बताते हैं - किसी के साथ विश्वासघात न करना, दान देना और सदैव सत्य बोलना। यह सज्जन पुरुषों का सर्वोत्तम व्रत है।
 
The noble men prescribe only three things—do not betray anyone, give charity and always speak the truth. This is the best vow of the noble men. 93 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)