Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.207.83h: वेदों में जो वर्णित है, वह धर्म का प्रथम लक्षण है। धर्मशास्त्रों में जो प्रतिपादित है, वह धर्म का दूसरा लक्षण है और शिष्टाचार धर्म का तीसरा लक्षण है। इस प्रकार सुसंस्कृत पुरुषों ने धर्म के तीन लक्षण स्वीकार किए हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 83h
 
 
श्लोक  3.207.83h 
वेदोक्त: परमो धर्मो धर्मशास्त्रेषु चापर:।
शिष्टाचारश्च शिष्टानां त्रिविधं धर्मलक्षणम्।
 
 
अनुवाद
वेदों में जो वर्णित है, वह धर्म का प्रथम लक्षण है। धर्मशास्त्रों में जो प्रतिपादित है, वह धर्म का दूसरा लक्षण है और शिष्टाचार धर्म का तीसरा लक्षण है। इस प्रकार सुसंस्कृत पुरुषों ने धर्म के तीन लक्षण स्वीकार किए हैं।
 
What is described in the Vedas is the first characteristic of religion. What is propounded in the religious texts is the second characteristic of religion and etiquette is the third characteristic of religion. In this way, cultured men have accepted three characteristics of religion. 82 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)