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mahabharat 3.207.82: जो महापुरुष आस्तिक, अहंकाररहित, ब्राह्मणों का आदर करने वाले, विद्वान और सदाचारी हैं, वे स्वर्ग में निवास करते हैं। 82.   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.207.82 
आस्तिका मानहीनाश्च द्विजातिजनपूजका:।
श्रुतवृत्तोपसम्पन्ना: सन्त: स्वर्गनिवासिन:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
जो महापुरुष आस्तिक, अहंकाररहित, ब्राह्मणों का आदर करने वाले, विद्वान और सदाचारी हैं, वे स्वर्ग में निवास करते हैं। 82.
 
Those great men who are believers, devoid of ego, respectful of brahmins, learned and endowed with good conduct, reside in heaven. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)