Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.80: जो सत्त्वगुण से युक्त हैं, जिनके आचरण और कर्म पापियों के लिए भी कठिन हैं और जो अपने शुभ कर्मों से संसार में सम्मानित हैं, उनके हिंसा आदि दुर्गुण स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं ॥80॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो सत्त्वगुण से युक्त हैं, जिनके आचरण और कर्म पापियों के लिए भी कठिन हैं और जो अपने शुभ कर्मों से संसार में सम्मानित हैं, उनके हिंसा आदि दुर्गुण स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं ॥80॥
Those who are endowed with the Sattva Guna, whose behaviour and actions are difficult for sinners and who are respected in the world by their good deeds, their vices like violence etc. get destroyed automatically. ॥ 80॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥