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mahabharat 3.207.79: जो तीनों वेदों के विद्वानों में श्रेष्ठ है, शुद्ध है, गुणवान है, बुद्धिमान है, गुरु की सेवा करता है और अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, वह विनयशील पुरुष कहलाता है।   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.207.79 
त्रैविद्यवृद्धा: शुचयो वृत्तवन्तो मनस्विन:।
गुरुशुश्रूषवो दान्ता: शिष्टाचारा भवन्त्युत॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
जो तीनों वेदों के विद्वानों में श्रेष्ठ है, शुद्ध है, गुणवान है, बुद्धिमान है, गुरु की सेवा करता है और अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, वह विनयशील पुरुष कहलाता है।
 
He who is the best among the scholars of the three Vedas, is pure, virtuous, intelligent, serves his Guru and has controlled his senses, is called a polite person. 79.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)