Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.77: "जो कुछ न्याय से आरम्भ होता है, उसे धर्म कहते हैं। इसके विपरीत जो होता है, उसे अधर्म कहते हैं।" - ऐसा सुसंस्कृत पुरुषों का कथन है। | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आरम्भोन्याययुक्तो य: स हि धर्म इति स्मृत:।
अनाचारस्त्वधर्मेति एतच्छिष्टानुशासनम्॥ ७७॥
अनुवाद
"जो कुछ न्याय से आरम्भ होता है, उसे धर्म कहते हैं। इसके विपरीत जो होता है, उसे अधर्म कहते हैं।" - ऐसा सुसंस्कृत पुरुषों का कथन है।
"Whatever is initiated by justice is called Dharma. The opposite of this is called Adharma (unrighteousness)." - this is the statement of the cultured men. 77.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥