Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.74: अहिंसा और सत्य बोलना सभी जीवों के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, किन्तु वह सत्य में ही प्रतिष्ठित है। महापुरुषों के सभी कार्य सत्य के आधार पर ही प्रारम्भ होते हैं। 74॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहिंसा सत्यवचनं सर्वभूतहितं परम्।
अहिंसा परमो धर्म: स च सत्ये प्रतिष्ठित:।
सत्ये कृत्वा प्रतिष्ठां तु प्रवर्तन्ते प्रवृत्तय:॥ ७४॥
अनुवाद
अहिंसा और सत्य बोलना सभी जीवों के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, किन्तु वह सत्य में ही प्रतिष्ठित है। महापुरुषों के सभी कार्य सत्य के आधार पर ही प्रारम्भ होते हैं। 74॥
Non-violence and speaking the truth are extremely beneficial for all living beings. Non-violence is the greatest religion, but it is established only in truth. All the work of great men begins on the basis of truth. 74॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥