Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.71: इसलिए नास्तिकों, धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करने वालों, क्रूर और पाप विचार रखने वालों का संग त्यागकर ज्ञान का आश्रय लेकर सत्पुरुषों की सेवा में लगा रह ॥ 71॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसलिए नास्तिकों, धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करने वालों, क्रूर और पाप विचार रखने वालों का संग त्यागकर ज्ञान का आश्रय लेकर सत्पुरुषों की सेवा में लगा रह ॥ 71॥
Therefore, abandon the company of atheists, those who violate the limits of religion, those who are cruel and have sinful thoughts and, taking refuge in knowledge, remain in the service of virtuous men. ॥ 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥