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mahabharat 3.207.70: अच्छे आचरण वाला व्यक्ति अपनी उत्कृष्ट बुद्धि को नियंत्रण में रखता है, अपने गुरु के सिद्धांतों का पालन करता है और धर्म और अर्थ का ध्यान रखते हुए मर्यादा में रहता है।   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  3.207.70 
नियच्छन्ति परां बुद्धिं शिष्टाचारान्विता जना:।
उपाध्यायमते युक्ता: स्थित्या धर्मार्थदर्शिन:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
अच्छे आचरण वाला व्यक्ति अपनी उत्कृष्ट बुद्धि को नियंत्रण में रखता है, अपने गुरु के सिद्धांतों का पालन करता है और धर्म और अर्थ का ध्यान रखते हुए मर्यादा में रहता है।
 
A man of good manners keeps his excellent intellect under control, follows the principles of his Guru and remains within limits while keeping an eye on Dharma and Artha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)