Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.63: जो काम, क्रोध, लोभ, अहंकार और दुष्टता को वश में करके केवल धर्म का पालन करके संतुष्ट रहते हैं, वे सदाचारी कहलाते हैं और सदाचारी लोग उनका आदर करते हैं ॥ 63॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो काम, क्रोध, लोभ, अहंकार और दुष्टता को वश में करके केवल धर्म का पालन करके संतुष्ट रहते हैं, वे सदाचारी कहलाते हैं और सदाचारी लोग उनका आदर करते हैं ॥ 63॥
Those who control lust, anger, greed, arrogance and wickedness and remain satisfied by following only Dharma (righteousness), are called well behaved and are respected by well behaved people. ॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥