Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.56: यदि मनुष्य पाप करके भी शुभ कर्मों में प्रवृत्त होता है, तो वह समस्त पापों से उसी प्रकार मुक्त हो जाता है, जैसे चन्द्रमा महान मेघ से मुक्त हो जाता है ॥ 56॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि मनुष्य पाप करके भी शुभ कर्मों में प्रवृत्त होता है, तो वह समस्त पापों से उसी प्रकार मुक्त हो जाता है, जैसे चन्द्रमा महान मेघ से मुक्त हो जाता है ॥ 56॥
If a man, even after committing a sin, engages in benevolent deeds, he becomes free from all sins like the moon freed from a great cloud. ॥ 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥