Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.54: जो मनुष्य पाप करके भी यह मानता है कि 'मैं पापी नहीं हूँ', वह भूल करता है क्योंकि देवता उसे और उसके पापों को देखते हैं और उसके भीतर बैठा परमात्मा भी उन्हें देखता है ॥ 54॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य पाप करके भी यह मानता है कि 'मैं पापी नहीं हूँ', वह भूल करता है क्योंकि देवता उसे और उसके पापों को देखते हैं और उसके भीतर बैठा परमात्मा भी उन्हें देखता है ॥ 54॥
A person who, even after committing a sin, believes that 'I am not a sinner', is mistaken because the gods see him and his sins and the Supreme Soul sitting within him also sees them. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥