Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.49: मूर्ख पुरुष केवल अपनी प्रशंसा के बल पर संसार में प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं करता; विद्वान पुरुष यदि यशहीन भी हो तो भी संसार में उसकी कीर्ति बढ़ती है ॥49॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मूर्ख पुरुष केवल अपनी प्रशंसा के बल पर संसार में प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं करता; विद्वान पुरुष यदि यशहीन भी हो तो भी संसार में उसकी कीर्ति बढ़ती है ॥49॥
A foolish man does not gain prestige in the world merely on the strength of his praise; even if a learned man is without glory, his fame in the world increases. 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥