Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.45: यदि कोई तुम्हारे साथ बुरा व्यवहार करे, तो तुम्हें भी उसके साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए । सबके साथ सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए । जो पापी दूसरों को हानि पहुँचाना चाहता है, उसका स्वयं ही नाश हो जाता है ॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न पापे प्रतिपाप: स्यात् साधुरेव सदा भवेत्।
आत्मनैव हत: पापो य: पापं कर्तुमिच्छति॥ ४५॥
अनुवाद
यदि कोई तुम्हारे साथ बुरा व्यवहार करे, तो तुम्हें भी उसके साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए । सबके साथ सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए । जो पापी दूसरों को हानि पहुँचाना चाहता है, उसका स्वयं ही नाश हो जाता है ॥ 45॥
If someone misbehaves with you, you should not misbehave with him in return. Always behave well with everyone. The sinner who wants to harm others gets destroyed on his own. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥