Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.33: मैं स्वयं कभी मांस नहीं खाता। मैं अपनी पत्नी के साथ केवल रजस्वला अवस्था में ही संभोग करता हूँ। हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं सदैव दिन में उपवास करता हूँ और रात्रि में भोजन करता हूँ। 33। | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न भक्षयामि मांसानि ऋतुगामी तथा ह्यहम्।
सदोपवासी च तथा नक्तभोजी सदा द्विज॥ ३३॥
अनुवाद
मैं स्वयं कभी मांस नहीं खाता। मैं अपनी पत्नी के साथ केवल रजस्वला अवस्था में ही संभोग करता हूँ। हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं सदैव दिन में उपवास करता हूँ और रात्रि में भोजन करता हूँ। 33।
I myself never eat meat. I have sexual intercourse with my wife only when I am in my period. O great Brahmin. I always fast during the day and eat at night. 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥