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mahabharat 3.207.31: राजा अपने धर्म का पालन करके ही प्रचुर धन प्राप्त करना चाहते हैं और राजा समस्त जातियों का रक्षक होता है ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.207.31 
राजानो हि स्वधर्मेण श्रियमिच्छन्ति भूयसीम्।
सर्वेषामेव वर्णानां त्राता राजा भवत्युत॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजा अपने धर्म का पालन करके ही प्रचुर धन प्राप्त करना चाहते हैं और राजा समस्त जातियों का रक्षक होता है ॥31॥
 
Kings desire to acquire abundant wealth only by following their Dharma and the king is the protector of all castes. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)