Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.24: कृषि, गोरक्षा, वाणिज्य, दण्डनीति और त्रयविद्या - ऋक्, यजु और साम के अनुसार यज्ञादिक अनुष्ठान करना और उनका पालन करना ही लोगों की जीविका के साधन हैं। इन्हीं के द्वारा सांसारिक और आध्यात्मिक उन्नति संभव है। 24॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृषि, गोरक्षा, वाणिज्य, दण्डनीति और त्रयविद्या - ऋक्, यजु और साम के अनुसार यज्ञादिक अनुष्ठान करना और उनका पालन करना ही लोगों की जीविका के साधन हैं। इन्हीं के द्वारा सांसारिक और आध्यात्मिक उन्नति संभव है। 24॥
Agriculture, cow protection, commerce, penal policy and Triyavidya – performing and performing Yajnadika rituals according to Rik, Yaju and Sama are the means of livelihood of the people. Only through these is worldly and spiritual progress possible. 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥