Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.23: द्विजश्रेष्ठ! वह किसी के दोषों की चर्चा नहीं करता और अपने से बलवान की निन्दा नहीं करता, क्योंकि पूर्व में किए गए शुभ-अशुभ कर्मों का फल कर्ता को ही भोगना पड़ता है। 23॥ | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न कुत्सयाम्यहं किंचिन्न गर्हे बलवत्तरम्।
कृतमन्वेति कर्तारं पुरा कर्म द्विजोत्तम॥ २३॥
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! वह किसी के दोषों की चर्चा नहीं करता और अपने से बलवान की निन्दा नहीं करता, क्योंकि पूर्व में किए गए शुभ-अशुभ कर्मों का फल कर्ता को ही भोगना पड़ता है। 23॥
Dwijshreshtha! He does not discuss anyone's faults and does not criticize someone stronger than him, because the doer himself has to suffer the consequences of the good and bad deeds done earlier. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥