Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.207.21: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं इस कुल में जन्म देकर विधाता द्वारा मुझे सौंपा गया कार्य कर रहा हूँ। मैं अपने वृद्ध माता-पिता की बड़ी लगन से सेवा कर रहा हूँ।॥21॥   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.207.21 
विधात्रा विहितं पूर्वं कर्म स्वमनुपालयन्।
प्रयत्नाच्च गुरू वृद्धौ शुश्रूषेऽहं द्विजोत्तम॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं इस कुल में जन्म देकर विधाता द्वारा मुझे सौंपा गया कार्य कर रहा हूँ। मैं अपने वृद्ध माता-पिता की बड़ी लगन से सेवा कर रहा हूँ।॥21॥
 
O best of Brahmins! I am performing the task assigned to me by the Creator by giving me birth in this family. I am serving my old parents with great diligence. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)