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mahabharat 3.207.14: मैं सब कुछ जानता हूँ कि उस पतिव्रता स्त्री ने तुम्हें यह कहकर भेजा है कि 'तुम मिथिलापुरी जाओ।' मैं यह भी जानता हूँ कि तुम यहाँ किस उद्देश्य से आए हो।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.207.14 
एकपत्न्या यदुक्तोऽसि गच्छ त्वं मिथिलामिति।
जानाम्येतदहं सर्वं यदर्थं त्वमिहागत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मैं सब कुछ जानता हूँ कि उस पतिव्रता स्त्री ने तुम्हें यह कहकर भेजा है कि 'तुम मिथिलापुरी जाओ।' मैं यह भी जानता हूँ कि तुम यहाँ किस उद्देश्य से आए हो।॥14॥
 
I know everything that the faithful lady has sent you saying, 'You should go to Mithilapuri'. I also know the purpose for which you have come here.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)