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mahabharat 3.207.12: ब्राह्मण को आया जानकर शिकारी सहसा तेजी से उठा और एकांत स्थान पर उस स्थान पर आया जहाँ ब्राह्मण खड़ा था।   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.207.12 
स तु ज्ञात्वा द्विजं प्राप्तं सहसा सम्भ्रमोत्थित:।
आजगाम यतो विप्र: स्थित एकान्तदर्शने॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण को आया जानकर शिकारी सहसा तेजी से उठा और एकांत स्थान पर उस स्थान पर आया जहाँ ब्राह्मण खड़ा था।
 
Knowing that the Brahmin had come, the hunter suddenly got up quickly and came to the place where the Brahmin was standing in a secluded place. 12.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)