Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.206.47-d1h: ब्राह्मण ने कहा— शुभ! तुम्हारा कल्याण हो। मैं तुम पर अत्यन्त प्रसन्न हूँ। मेरा सारा क्रोध दूर हो गया है। तुमने जो फटकार लगाई है, वह अनुचित नहीं है, वह मेरे लिए अत्यन्त कल्याणकारी है। शोभने! तुम्हारा कल्याण हो। अब मैं जाकर अपना कार्य पूरा करूँगा। कल्याणी! तुम धन्य हो, जिनका आचरण इतना उच्चकोटि का है। | mahabharat अध्याय 3.206: कौशिक ब्राह्मण और पतिव्रताके उपाख्यानके अन्तर्गत ब्राह्मणोंके धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण ने कहा— शुभ! तुम्हारा कल्याण हो। मैं तुम पर अत्यन्त प्रसन्न हूँ। मेरा सारा क्रोध दूर हो गया है। तुमने जो फटकार लगाई है, वह अनुचित नहीं है, वह मेरे लिए अत्यन्त कल्याणकारी है। शोभने! तुम्हारा कल्याण हो। अब मैं जाकर अपना कार्य पूरा करूँगा। कल्याणी! तुम धन्य हो, जिनका आचरण इतना उच्चकोटि का है।
The Brahmin said— Shubh! May you be blessed. I am very pleased with you. All my anger has gone away. The rebuke you have given is not an inappropriate word, it is extremely beneficial for me. Shobhane! May you be blessed. Now I will go and accomplish my task. Kalyani! You are blessed, whose good conduct is of such a high order. 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥