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श्लोक  3.206.46 
अत्युक्तमपि मे सर्वं क्षन्तुमर्हस्यनिन्दित।
स्त्रियो ह्यवध्या: सर्वेषां ये च धर्मविदो जना:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! यदि मैंने कोई अनुचित वचन कहे हों, तो कृपया मुझे क्षमा करें, क्योंकि धर्म के जानकारों की दृष्टि में स्त्रियाँ दंडनीय नहीं हैं।
 
Unpunishable Brahmin! If I have uttered any inappropriate words, please forgive me for them, because in the eyes of all those who are knowledgeable about Dharma, women are unpunishable. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)