Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.206.40-41: धर्म के जानकार कहते हैं कि सत्य और सरलता ही श्रेष्ठ धर्म हैं। सनातन धर्म का स्वरूप जानना अत्यन्त कठिन है, परन्तु वह सत्य पर आधारित है। जो कुछ वेदों से सिद्ध है, वही धर्म है - यही वृद्धों का उपदेश है। ॥40-41॥ | mahabharat अध्याय 3.206: कौशिक ब्राह्मण और पतिव्रताके उपाख्यानके अन्तर्गत ब्राह्मणोंके धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्यार्जवे धर्ममाहु: परं धर्मविदो जना:॥ ४०॥
दुर्ज्ञेय: शाश्वतो धर्म: स च सत्ये प्रतिष्ठित:।
श्रुतिप्रमाणो धर्म: स्यादिति वृद्धानुशासनम्॥ ४१॥
अनुवाद
धर्म के जानकार कहते हैं कि सत्य और सरलता ही श्रेष्ठ धर्म हैं। सनातन धर्म का स्वरूप जानना अत्यन्त कठिन है, परन्तु वह सत्य पर आधारित है। जो कुछ वेदों से सिद्ध है, वही धर्म है - यही वृद्धों का उपदेश है। ॥40-41॥
Those who know Dharma, say that truth and simplicity are the best Dharma. It is very difficult to know the nature of Sanatan Dharma, but it is based on truth. Whatever is proved by the Vedas is Dharma – this is the advice of the elders. ॥ 40-41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥