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mahabharat 3.206.4-5h: यह देखकर ब्राह्मण क्रोधित हो गया और पक्षी के बारे में बुरा-भला सोचने लगा। उसने बगुले को बड़े क्रोध से देखा और उसके बारे में बुरा-भला सोचने लगा, जिससे वह धरती पर गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 3.206: कौशिक ब्राह्मण और पतिव्रताके उपाख्यानके अन्तर्गत ब्राह्मणोंके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.206.4-5h 
तामवेक्ष्य तत: क्रुद्ध: समपध्यायत द्विज:।
भृशं क्रोधाभिभूतेन बलाका सा निरीक्षिता॥ ४॥
अपध्याता च विप्रेण न्यपतद् धरणीतले।
 
 
अनुवाद
यह देखकर ब्राह्मण क्रोधित हो गया और पक्षी के बारे में बुरा-भला सोचने लगा। उसने बगुले को बड़े क्रोध से देखा और उसके बारे में बुरा-भला सोचने लगा, जिससे वह धरती पर गिर पड़ा।
 
Seeing this the Brahmin became angry and started thinking ill of the bird. He looked at the heron in great anger and thought ill of it, so it fell on the earth. 4 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)