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mahabharat 3.206.39-40h: द्विजश्रेष्ठ! स्वाध्याय, मन पर संयम, सरलता और इन्द्रियों पर संयम - ये ब्राह्मण के लिए सनातन धर्म कहे गए हैं । 39 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.206: कौशिक ब्राह्मण और पतिव्रताके उपाख्यानके अन्तर्गत ब्राह्मणोंके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.206.39-40h 
धर्मं तु ब्राह्मणस्याहु: स्वाध्यायं दममार्जवम्॥ ३९॥
इन्द्रियाणां निग्रहं च शाश्वतं द्विजसत्तम।
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! स्वाध्याय, मन पर संयम, सरलता और इन्द्रियों पर संयम - ये ब्राह्मण के लिए सनातन धर्म कहे गए हैं । 39 1/2॥
 
Dwijshreshtha! Self-study, control over the mind, simplicity and control over the senses - these have been called Sanatan Dharma for a Brahmin. 39 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)