Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.206.32: मुझे पता चला है कि आपने क्रोध में आकर एक बगुले को जला दिया था। हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मनुष्यों का एक बहुत बड़ा शत्रु है, वह उनके शरीर में रहता है। उसका नाम 'क्रोध' है।   |   mahabharat अध्याय 3.206: कौशिक ब्राह्मण और पतिव्रताके उपाख्यानके अन्तर्गत ब्राह्मणोंके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 206: कौशिक ब्राह्मण और पतिव्रताके उपाख्यानके अन्तर्गत ब्राह्मणोंके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.206.32 
बलाका हि त्वया दग्धा रोषात् तद् विदितं मया।
क्रोध: शत्रु: शरीरस्थो मनुष्याणां द्विजोत्तम॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मुझे पता चला है कि आपने क्रोध में आकर एक बगुले को जला दिया था। हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मनुष्यों का एक बहुत बड़ा शत्रु है, वह उनके शरीर में रहता है। उसका नाम 'क्रोध' है।
 
I have come to know that you burnt a heron in anger. O best of Brahmins! Humans have a very big enemy, he lives in their body. His name is 'anger'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)