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श्लोक  3.206.30 
पतिशुश्रूषया धर्मो य: स मे रोचते द्विज।
दैवतेष्वपि सर्वेषु भर्ता मे दैवतं परम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणी! मुझे अपने पति की सेवा से मिलने वाला पुण्य सबसे अधिक प्रिय है। मेरे पति सभी देवताओं में सबसे बड़े देवता हैं।
 
O Brahmin! I like the virtue that I get by serving my husband the most. My husband is the greatest god among all the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)