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mahabharat 3.206.14: वह अपने हृदय की सारी भावनाएँ और सारा प्रेम अपने पति को अर्पित करके उनकी सेवा में समर्पित रहती थी। वह सदाचार का पालन करती थी, भीतर-बाहर से पवित्र रहती थी, घर के काम कुशलतापूर्वक करती थी और परिवार में सभी के लिए मंगल कामना करती थी।   |   mahabharat अध्याय 3.206: कौशिक ब्राह्मण और पतिव्रताके उपाख्यानके अन्तर्गत ब्राह्मणोंके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.206.14 
तं सर्वभावोपगता पतिशुश्रूषणे रता।
साध्वाचारा शुचिर्दक्षा कुटुम्बस्य हितैषिणी॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वह अपने हृदय की सारी भावनाएँ और सारा प्रेम अपने पति को अर्पित करके उनकी सेवा में समर्पित रहती थी। वह सदाचार का पालन करती थी, भीतर-बाहर से पवित्र रहती थी, घर के काम कुशलतापूर्वक करती थी और परिवार में सभी के लिए मंगल कामना करती थी।
 
She offered all the feelings of her heart and all her love to her husband and remained devoted to his service. She followed good conduct, remained pure from inside and outside, did household chores efficiently and wished well for everyone in the family.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)