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श्लोक 3.205.23-24  |
एतत् प्रकरणं राजन्नधिकृत्य युधिष्ठिर॥ २३॥
पतिव्रतानां नियतं धर्मं चावहित: शृणु॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| राजा युधिष्ठिर! इस अध्याय में पतिव्रता पत्नी के निर्धारित कर्तव्यों का वर्णन होगा। ध्यानपूर्वक सुनो। 23-24। |
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| King Yudhishthira! In this chapter the prescribed duties of a faithful wife will be described. Listen carefully. 23-24. |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि पतिव्रतोपाख्याने पञ्चाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें पतिव्रतोपाख्यानविषयक
दो सौ पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०५॥ |
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