Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.205.17: कुछ लोग माता को गौरव की दृष्टि से महान मानते हैं। कुछ लोग पिता को महत्व देते हैं। परन्तु जो माता अपने बच्चों का पालन-पोषण करके उन्हें बड़ा बनाती है, वह बहुत कठिन कार्य है ॥17॥ | mahabharat अध्याय 3.205: पतिव्रता स्त्री तथा पिता-माताकी सेवाका माहात्म्य । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मातॄस्तु गौरवादन्ये पितॄनन्ये तु मेनिरे।
दुष्करं कुरुते माता विवर्धयति या प्रजा:॥ १७॥
अनुवाद
कुछ लोग माता को गौरव की दृष्टि से महान मानते हैं। कुछ लोग पिता को महत्व देते हैं। परन्तु जो माता अपने बच्चों का पालन-पोषण करके उन्हें बड़ा बनाती है, वह बहुत कठिन कार्य है ॥17॥
Some people consider mothers to be great in terms of pride. Others give importance to fathers. But the mother who nurtures her children and makes them big is a very difficult task. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥