Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.205.14: ब्रह्मन्! कृपया मुझे क्षत्रियों के धर्म और आचरण के सिद्धान्त विस्तारपूर्वक बताइये। विप्रवर! जो क्रूर स्वभाव वाले हैं, उनके लिए महात्माओं का धर्म अत्यंत दुर्लभ है। 14॥ | mahabharat अध्याय 3.205: पतिव्रता स्त्री तथा पिता-माताकी सेवाका माहात्म्य । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षत्रधर्मसमाचारतत्त्वं व्याख्याहि मे द्विज।
धर्म: सुदुर्लभो विप्र नृशंसेन महात्मनाम्॥ १४॥
अनुवाद
ब्रह्मन्! कृपया मुझे क्षत्रियों के धर्म और आचरण के सिद्धान्त विस्तारपूर्वक बताइये। विप्रवर! जो क्रूर स्वभाव वाले हैं, उनके लिए महात्माओं का धर्म अत्यंत दुर्लभ है। 14॥
Brahman! Please tell me in detail the principles of religion and conduct of Kshatriyas. Vipravara! The religion of Mahatmas is very rare for those who are cruel in nature. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥