Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.205.10-11h: इससे अधिक आश्चर्य की बात और क्या हो सकती है कि स्त्रियाँ दस महीने तक अपने गर्भ में बच्चे को रखती हैं और फिर समय आने पर उसे जन्म देती हैं?॥ 10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.205: पतिव्रता स्त्री तथा पिता-माताकी सेवाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 205: पतिव्रता स्त्री तथा पिता-माताकी सेवाका माहात्म्य  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  3.205.10-11h 
कुक्षिणा दश मासांश्च गर्भं संधारयन्ति या:॥ १०॥
नार्य: कालेन सम्भूय किमद्‍भुततरं तत:।
 
 
अनुवाद
इससे अधिक आश्चर्य की बात और क्या हो सकती है कि स्त्रियाँ दस महीने तक अपने गर्भ में बच्चे को रखती हैं और फिर समय आने पर उसे जन्म देती हैं?॥ 10 1/2॥
 
What can be more wonderful than the fact that women carry a child in their womb for ten months and then give birth to it in due course?॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)