Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.203.32-33h: हे सुन्दर नेत्रों वाले देवेश्वर! हम दोनों आपके पुत्र हों। हमने आपसे यही वर माँगा है। कृपया इसे अच्छी तरह समझ लीजिए। हे देवश्रेष्ठ! हमने जो वचन दिया है, वह मिथ्या नहीं होना चाहिए। ॥32 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.203: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति और भगवान् विष्णुके द्वारा मधु-कैटभका वध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्रत्वमधिगच्छाव तव चापि सुलोचन।
वर एष वृतो देव तद् विद्धि सुरसत्तम॥ ३२॥
अनृतं मा भवेद् देव यद्धि नौ संश्रुतं तदा।
अनुवाद
हे सुन्दर नेत्रों वाले देवेश्वर! हम दोनों आपके पुत्र हों। हमने आपसे यही वर माँगा है। कृपया इसे अच्छी तरह समझ लीजिए। हे देवश्रेष्ठ! हमने जो वचन दिया है, वह मिथ्या नहीं होना चाहिए। ॥32 1/2॥
O beautiful-eyed Devaswara! May we both be your sons. This is the boon we have asked from you. Please understand this well. O best of the gods! The promise we have made should not be false. ॥ 32 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥