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mahabharat 3.203.28: मधु और कैटभ बोले, "पुरुषोत्तम! हमने पहले कभी भी, यहाँ तक कि अपने असंयमित आचरण में भी झूठ नहीं बोला, फिर हम किसी अन्य समय में कैसे झूठ बोल सकते हैं? कृपया हम दोनों को सत्य और धर्म में रत समझें।" 28.   |   mahabharat अध्याय 3.203: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति और भगवान् विष्णुके द्वारा मधु-कैटभका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.203.28 
मधुकैटभावूचतु:
अनृतं नोक्तपूर्वं नौ स्वैरेष्वपि कुतोऽन्यथा।
सत्ये धर्मे च निरतौ विद्धॺावां पुरुषोत्तम॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मधु और कैटभ बोले, "पुरुषोत्तम! हमने पहले कभी भी, यहाँ तक कि अपने असंयमित आचरण में भी झूठ नहीं बोला, फिर हम किसी अन्य समय में कैसे झूठ बोल सकते हैं? कृपया हम दोनों को सत्य और धर्म में रत समझें।" 28.
 
Madhu and Kaitabha said, "Purushottam! We have never lied before, even in our unrestrained behaviour, so how can we lie at any other time? Please consider us both devoted to truth and Dharma." 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)