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mahabharat 3.203.27: हे सच्चे वीर! तुम दोनों मेरे हाथों मारे जाओगे। मैं सम्पूर्ण जगत के कल्याण के लिए तुमसे यह कामना चाहता हूँ। 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.203: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति और भगवान् विष्णुके द्वारा मधु-कैटभका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.203.27 
वध्यत्वमुपगच्छेतां मम सत्यपराक्रमौ।
एतदिच्छाम्यहं कामं प्राप्तुं लोकहिताय वै॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे सच्चे वीर! तुम दोनों मेरे हाथों मारे जाओगे। मैं सम्पूर्ण जगत के कल्याण के लिए तुमसे यह कामना चाहता हूँ। 27॥
 
True brave hero! Both of you will be killed by my hands. I want to achieve this wish from you for the benefit of the entire world. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)