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mahabharat 3.202.8: शत्रुओं का संहार करने वाले बुद्धिमान राजा बृहदश्व राजलक्ष्मी का भार अपने पुत्र पर छोड़कर स्वयं तपोवन में तपस्या के लिए चले गए ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.202.8 
पुत्रसंक्रामितश्रीस्तु बृहदश्वो महीपति:।
जगाम तपसे धीमांस्तपोवनममित्रहा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का संहार करने वाले बुद्धिमान राजा बृहदश्व राजलक्ष्मी का भार अपने पुत्र पर छोड़कर स्वयं तपोवन में तपस्या के लिए चले गए ॥8॥
 
The wise king Brihadashva, who killed the enemies, left the burden of Rajalakshmi on his son and himself went to Tapovan for penance. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)