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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह
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श्लोक 6
श्लोक
3.202.6
सर्वे विद्यासु निष्णाता बलवन्तो दुरासदा:।
कुवलाश्वश्च पितृतो गुणैरभ्यधिकोऽभवत्॥ ६॥
अनुवाद
वह समस्त विद्याओं में निपुण, बलवान और वीर योद्धा था। उत्तम गुणों में कुवलाश्व अपने पिता से भी बढ़कर था ॥6॥
He was adept in all the sciences, strong and a brave warrior. Kuvalashva surpassed his father in excellent qualities. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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