श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.202.4 
तस्य श्रावस्तको ज्ञेय: श्रावस्ती येन निर्मिता।
श्रावस्तकस्य दायादो बृहदश्वो महाबल:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्राव के पुत्र श्रावस्त हुए, जिन्होंने श्रावस्तीपुरी बसाई। श्रावस्त के ही पुत्र महाबली बृहदश्व हुए। 4॥
 
Shrava's son was Shravasta, who founded Shravastipuri. Shravasta's own son was the mighty Brihadashva. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)