न हि धुन्धुर्महातेजास्तेजसाल्पेन शक्यते।
निर्दग्धुं पृथिवीपाल स हि वर्षशतैरपि॥ ३१॥
अनुवाद
राजा ! धुंधु बड़ा बलवान राक्षस है। उसे कोई भी साधारण शक्ति से सौ वर्षों में भी नष्ट नहीं कर सकता ॥31॥
King! Dhundhu is a very powerful demon. No one can destroy him even in a hundred years with ordinary power. ॥ 31॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि धुन्धुमारोपाख्याने द्वॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें धुन्धुमारोपाख्यानविषयक
दो सौ दोवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥