श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.202.30 
तत् तेजस्त्वं समाधाय राजेन्द्र भुवि दु:सहम्।
तं निषूदय राजेन्द्र दैत्यं रौद्रपराक्रमम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! अतः आप भगवान की असह्य शक्ति को धारण करके पृथ्वी पर रहने वाले उस भयंकर एवं शक्तिशाली राक्षस का नाश करें।
 
Maharaj! Therefore, you should adopt the unbearable power of the Lord and destroy that fearsome and powerful demon living on the Earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)