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mahabharat 3.202.22: महाराज! आपका कल्याण हो। उस राक्षस का नाश करो। आपको अन्यथा नहीं सोचना चाहिए। उसे मारकर आप चिरस्थायी और महान यश प्राप्त करेंगे ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 3.202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.202.22 
तं विनाशय भद्रं ते मा ते बुद्धिरतोऽन्यथा।
प्राप्स्यसे महतीं कीर्तिं शाश्वतीमव्ययां ध्रुवाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपका कल्याण हो। उस राक्षस का नाश करो। आपको अन्यथा नहीं सोचना चाहिए। उसे मारकर आप चिरस्थायी और महान यश प्राप्त करेंगे ॥22॥
 
Maharaj! May you be blessed. Destroy that demon. You should not think otherwise. By killing him you will attain everlasting and great fame. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)