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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 202: उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुका वध करनेके लिये आग्रह  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.202.16 
ममाश्रमसमीपे वै समेषु मरुधन्वसु।
समुद्रो बालुकापूर्ण उज्जालक इति स्मृत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मेरे आश्रम के पास, सम्पूर्ण मरुस्थलीय प्रदेश में रेत से भरा एक समुद्र है, उसका नाम उज्जलक है।
 
Near my hermitage, in the entire desert region there is a sea full of sand, its name is Ujjalaka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)